पिंज्जका (संज्ञा) किसे कहते हैं? | What is Noun in Kurukh Language (कुँडुख़ व्याकरण)
कुँडुख़ व्याकरण में पिंज्जका (संज्ञा) की परिभाषा, भेद (5 प्रकार) और उदाहरण सरल भाषा में सीखें। JSSC, JPSC और Kurukh भाषा परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी।
कुँडुख़ (Kurukh) भाषा और व्याकरण में पिंज्जका (Pinjjka) का अर्थ संज्ञा (Noun) होता है। किसी भी भाषा की तरह कुँडुख़ व्याकरण (कत्थ अइन) में भी पिंज्जका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यदि आप JSSC CGL, JPSC या कुँडुख़ भाषा की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो संज्ञा (पिंज्जका) के नियमों और उसके भेदों को समझना बेहद आवश्यक है।
पिंज्जका (संज्ञा) की परिभाषा (Definition of Noun in Kurukh)
कुँडुख़ में परिभाषा:एक 'अम मुद्ध आलस / आली, आलो अरा अड्डा गहि नामेन पिंज्जका ब'अनर।
हिंदी अनुवाद:किसी खास व्यक्ति, वस्तु, स्थान के नाम या विचार/भाव का बोध कराने वाले शब्दों को संज्ञा (पिंज्जका) कहते हैं।
उदाहरण (Examples):
- आलस / आली (व्यक्ति): कार्तिक बाबू, पच्चो, पच्चगी
- अड्डा / परता (स्थान/पहाड़): राँची, पटना, परता (पहाड़), टोडंग (जंगल)
- आलो (वस्तु): घोडो (घोड़ा), खाड़ (नदी), खोसरा
पिंज्जका गहि पंचे डाड़ा मनी (संज्ञा के 5 भेद - Types of Noun in Kurukh)
कुँडुख़ व्याकरण में संज्ञा (पिंज्जका) के 5 प्रमुख भेद (डाड़ा) होते हैं:
- नामे पिंज्जका (व्यक्तिवाचक संज्ञा - Proper Noun)
- गयरह पिंज्जका (जातिवाचक संज्ञा - Common Noun)
- गोठ पिंज्जका (समूहवाचक संज्ञा - Collective Noun)
- दरप पिंज्जका (द्रव्यवाचक संज्ञा - Material Noun)
- मनगुन पिंज्जका (भाववाचक संज्ञा - Abstract Noun)
1. नामे पिंज्जका (व्यक्तिवाचक संज्ञा - Proper Noun)
परिभाषा:
एक पिंज्जका ती एक 'अम मुड मलता ओंटा एकला आलो गहि पत नु अख़तार' ई, अदिन नामे पिंज्जका ब'अनर।
(जिस संज्ञा से किसी विशेष अथवा एक ही व्यक्ति, स्थान या वस्तु की जानकारी हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।)
प्रमुख उदाहरण:
- महापुरुष/व्यक्ति: जतरा टाना भगत, वीर बुदहु भगत, कार्तिक उराँव, बिरसा मुण्डा
- नदियाँ: संख खाड़, गंग्गा (गंगा)
- पहाड़/स्थान: फेसी ढुंगरी, सिलागमी ढुंगरी, मूरतो परता, नेतरहाट परता
2. गयरह पिंज्जका (जातिवाचक संज्ञा - Common Noun)
परिभाषा:
एका नामे ती आ मइदका गहि देर आलो अख़तारई या एका पिंज्जका तो ढेर बंग्गे आलो गहि पत अखतार ई, अदिन गयरह पिंज्जका ब'अनर।
(जिस शब्द से किसी संपूर्ण जाति या वर्ग की वस्तुओं/प्राणियों का बोध हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।)
प्रमुख उदाहरण:
- मानव/संबोधन: खद्दर (बच्चे), आलर (लोग), पेल्लर (लड़कियाँ), मेतर (पुरुष)
- प्रकृति/स्थान: परता (पहाड़), खाड़ (नदी), मन्न (पेड़)
- पशु-पक्षी: अल्ला (कुत्ता), अड्डो (बैल), मनखा (भैंस), ओ-डा (पक्षी), एड़ा (बकरी), भिड़ी (भेड़)
- अन्य: पूँप (फूल)
3. गोठ पिंज्जका (समूहवाचक संज्ञा - Collective Noun)
परिभाषा:
एका पिंज्जका ती एक 'अम गोठ अख़तार' ई, अदिन गोठ पिंज्जका ब'अनर।
(जिस संज्ञा शब्द से किसी समूह, सभा या झंड का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।)
प्रमुख उदाहरण:
- जतरा (मेला)
- पेठ (बाजार)
- बइसकी (पंचायत / सभा)
- फउद (सेना / दल)
- बाँसबखरे (बांस का झुरमुट)
- बारात, जुलूस, खंजपा झोपा (फलों का गुच्छा)
4. दरप पिंज्जका (द्रव्यवाचक संज्ञा - Material Noun)
परिभाषा:
एक पिंज्जका तो दरप आबो आलोन अख़तार' ई, अदिन दरप पिंज्जका बअनर।
(जिस संज्ञा से किसी द्रव्य, धातु या नाप-तौल वाली सामग्री की जानकारी मिले, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।)
प्रमुख उदाहरण:
- सोना (Gold)
- रूपा (Silver)
- अम्म (पानी)
- दुदुही (दूध)
- बेक (नमक)
- चीनी (Sugar)
- घिंव (घी)
- इमूंग (तेल)
5. मनगुन पिंज्जका (भाववाचक संज्ञा - Abstract Noun)
परिभाषा:
एका पिंज्जका बक ती एक अम जिया आबो आलो मलता बेगर जिया आबो आलो घी गुन अख़तारई, अदिन मनगुन पिंज्जका ब'अनर।
(जिस संज्ञा शब्द से किसी सजीव अथवा निर्जीव वस्तु के गुण, दशा, स्वभाव या भाव का पता चलता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।)
प्रमुख उदाहरण:
- लूर (बुद्धि / ज्ञान)
- नड़ी (बुखार)
- कीड़ा (भूख)
- मेच्छा (ऊँचाई)
- अरगना (चढ़ना)
- नलख (काम)
- घोख (सोच / विचार)
- आलखना (हंसना)
- खुसमारना (खुश होना)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न एवं उत्तर (Frequently Asked Questions - FAQ)
Q1. पिंज्जका गहि एवंदा डाड़ा मनी? (संज्ञा के कितने भेद होते हैं?)
उत्तर: पिंज्जका गहि पंचे डाड़ा मनी (संज्ञा के 5 भेद होते हैं)।
Q2. 'फंसी ढुंगरी' एका पिंज्जका तली तेंग्गा?
उत्तर: नामे पिंज्जका हिके (व्यक्तिवाचक संज्ञा)।
Q3. 'परता' एका पिंज्जका हिके तेंग्गा?
उत्तर: गयरह पिंज्जका हिके (जातिवाचक संज्ञा)।
Q4. 'बइसकी' किस प्रकार की संज्ञा है?
उत्तर: गोठ पिंज्जका (समूहवाचक संज्ञा)।
निष्कर्ष (Conclusion)
कुँडुख़ भाषा में पिंज्जका (संज्ञा) और उसके 5 भेदों का ज्ञान भाषा में पकड़ मजबूत बनाने और प्रतियोगी परीक्षाओं में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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