कुँड़ुख़ व्याकरण: गुनखी (विशेषण) किसे कहते हैं? परिभाषा, भेद और उदाहरण

कुँड़ुख़  (उरांव) व्याकरण में गुनखी (विशेषण) किसे कहते हैं? जानिए गुनखी की परिभाषा, इसके 4 प्रमुख भेद (गुणवाचक, परिमाणवाचक, संख्यावाचक, संकेतवाचक) और उदाहरण।

कुँड़ुख़  व्याकरण: गुनखी (विशेषण) किसे कहते हैं? | Definition, Types & Examples

1. गुनखी (विशेषण) की परिभाषा

कुँड़ुख़  परिभाषा: एका बक पिंज्जका मलता उइजि पिंज्जका गहि बिहइतन (विशेषता) तिंग्गु बकन गुनख़ी (विशेषण) बअनर्।

हिंदी अनुवाद: जो शब्द संज्ञा तथा सर्वनाम की विशेषता बतलाते हैं, उन शब्दों को विशेषण (गुनखी) कहते हैं।

उदाहरण (एकासे का):

  • रधा कोड़े कुकोय तली (राधा अच्छी लड़की है)

  • कृष्णस अकय दव कुक्कोस तलदस (कृष्णा बहुत अच्छा लड़का है)

  • नीन कोड़े आल हिकदय (तुम अच्छे आदमी हो)

स्पष्टीकरण:

उपरोक्त वाक्यों में:

  1. 1. 'रधा' पिंज्जका (संज्ञा) की विशेषता 'कोड़े' (अच्छी) बता रहा है।

  2. 2. 'कृष्णस' पिंज्जका (संज्ञा) की विशेषता 'दव' (अच्छा) बता रहा है।

  3. 3. 'नीन' उइजी पिंज्जका (सर्वनाम) की विशेषता 'कोड़े' (अच्छा) बता रहा है।

अतः 'कोड़े' और 'दव' शब्द गुनखी (विशेषण) हैं।

2. गुनखी गहि भेद (विशेषण के प्रकार)

कुँड़ुख़  भाषा में गुनखी (विशेषण) के चार भेद (नाख गोटंग डाड़ा) होते हैं:

  1. गुन गुनखी (गुणवाचक विशेषण)

  2. जोक्खा गुनखी (परिमाणवाचक विशेषण)

  3. लेक्खा गुनखी (संख्यावाचक विशेषण)

  4. चुगुल गुनखी (संकेतवाचक विशेषण)





Gunkhi (vesheshan)

(i) गुन गुनखी (गुणवाचक विशेषण)

परिभाषा: एका बक पिंज्जका मलता उइजि पिंज्जका गहि दव, मलदव अरा बिहईतन तिंग्गी, अदिन गुन गुनखी ब’अनर।

(जो शब्द संज्ञा अथवा सर्वनाम के गुण, दोष, रंग-रूप या विशेषता की जानकारी देते हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते हैं।)

उदाहरण:

  • इद मोख़ारो अल्ला हिके। (यह काली कुतिया है।) 

  • ई मन्न पुड्डा र’ई। (यह पेड़ छोटा/नाटा है।)

  • पंजका टट्खा तीनीई। (पका हुआ आम मीठा है।)

  • ई मन्न मेच्छा र’ई। (यह पेड़ ऊंचा है।)

  • सोमरस दव कुक्कोस हिकदस। (सोमरा अच्छा लड़का है।)

  • मंगरस मलदव आलस हिकदस। (मंगरा बुरा आदमी है।)

  • आ कुक्कोय चेटगर र’ई। (वह लड़की चतुर है।)

  • इद खें-सो मरीचा खड़खा लग्गी। (यह लाल मिर्च तीखी है।)

  • ईद ख़ेसो किचरी हिके (यह लाल कपड़ा है)

विशेषण शब्द: दव (अच्छा), मलदव (बुरा), चेटगर (चतुर), मोखरो (काला), खें-सो (लाल), मेच्छा (ऊंचा), तीनीई (मीठा)।

(ii) जोक्ख़ा गुनख़ी (परिमाणवाचक विशेषण)

परिभाषा: एका बक ती पिंज्जका मलता उइजि पिंज्जका घी जोक्खा अख़तारई, अदिन जोक्खा गुनखी ब’अनर।

(जिस शब्द से संज्ञा अथवा सर्वनाम की मात्रा या परिमाण का बोध होता है, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं।)

उदाहरण:

  • जोखनस जोक्क पुड्डा रअदस। (जोखना थोड़ा नाटा है।)

  • एंग्गा जुक्की ख़ेस्स चिआ। (मुझे थोड़ा धान दो।)

  • मंगरस गहि जुक्की ख़ेस्स मंजा। (मंगरा का थोड़ा धान हुआ।)

  • बुधवस तनि कुना मंड्डी ओनदस। (बुधवा थोड़ा सा भात खाता है।)

  • ए-न तनिक अम्म ओंद्दन। (मैं थोड़ा पानी पीता हूँ।)

  • स्वर्ण रेखा खाड़ अकय दिगहा र’ई (स्वर्णरेखा नदी बहुत लंबी है।)

  • आ मन्न अकय मेंच्छ र’ई। (वह पेड़ बहुत ऊंचा है।)

  • ई कुबीई नू जुक्की अम्म रई। (इस कुएं में थोड़ा पानी है।)

(iii) लेक्खा गुनखी (संख्यावाचक विशेषण)

परिभाषा: गुनखी ही एका बक ती पिंज्जका मलता उइजि पिंज्जका गहि लेक्खा अख़तराई, अदिन लेक्खा गुनखी बअनर।

(विशेषण के जिन शब्दों से संज्ञा अथवा सर्वनाम की संख्या का बोध हो, उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।)

उदाहरण:

  • एंगहय गुया सय झनर पाहीयर बरचर।  (मेरे पास में सात मेहमान आए।)

  • टुक्की नु अख़ टट्खा र’ई। (टोकरी में आठ आम हैं।)

  • दोयझन आलर बरआ लगनर। (दस आदमी आ रहे हैं)

  • ए-न पंचे पुथि खिंदकन। (मैंने पांच किताबें खरीदीं।)

  • एंगहय ऍड़ उड्डू खेस्स मंजा। (मेरा दो टोकरी धान हुआ)

  • ओंटा ढिवा चिआ। (एक रुपया दो।)

  • एंगहय मूंद जोड़ा मनख़ा गोहला र’ई (मेरे पास तीन जोड़ी भैंसें हैं)

  • अख़झन पेल्लार अरा जोक्ख़ार अखड़ा नू तोकनार (आठ लड़कियां और लड़के अखड़ा में नाच रहे हैं)

  • नाख़ झन कुकोयर कोमड़खा अड़खा तोक्खा लगनर (चार लड़के कोइनार का साग तोड़ रहे हैं)

संख्या सूचक शब्द: ओंटा (एक), ऍड़ (दो), मूंद (तीन), नाख़ (चार), पंचे (पांच), अख़ (आठ), सय (सात)।

(iv) चुगुल गुनख़ी (संकेतवाचक विशेषण)

परिभाषा: एका उइजि पिंज्जका एकअम पिंज्जका तरा चुगुल ईदई, अदिन चुगुल गुनखी बअनर।

(जो सर्वनाम किसी संज्ञा की ओर संकेत करते हैं, उन्हें संकेतवाचक विशेषण कहते हैं।)

उदाहरण:

  • आ कुक्कोय दव र’ई। (वह लड़की अच्छी है।)

  • ई परता नम्हय हिके। (यह पहाड़ हमारा है।)

  • हू आलस एन्देर कादस (वह आदमी कहाँ जा रहा है)

  • ई तिख़िल नेखाय हिके। (यह चावल किसका है)

  • आ पेल्लो एड़ा खप्पा लग्गी (वह लड़की बकरी चरा रही है)

  • ई पुथि निंग्हय हिके (यह किताब तुम्हारी है)

  • हूँ मुक्का निंग्हय नासगो हिके। (वह औरत तुम्हारी भाभी है।)

  • ई किच्चरी एंग आली गहि हिके। (यह कपड़ा मेरी पत्नी का है।)

  • आ आलस इंजो धर’आ लगदस। (वह आदमी मछली पकड़ रहा है।)

3. गुनखी गहि जोक्ख बक (विशेषण के कुछ प्रमुख शब्द)

कुँड़ुख़  शब्द (Kurukh)

हिंदी अर्थ (Hindi Meaning)

चेड़ा पेल्लो

दुबली लड़की

छयला जोख़स

सुंदर/सजीला युवक

छयला पेल्लो

सुंदर/सजीली युवती

पंडरू आलस

गोरा आदमी

मेच्छा आली

लंबी औरत

पंडरू अड्डो

सफेद बैल

ख़े-सो ओड़ा

लाल पक्षी

कोहा परता

बड़ा पहाड़

कबरा ओय

चितकबरी गाय

मेच्छा मुक्का

लंबी औरत

पुना कनिया

नई दुल्हन

पुड्ड़ा आलस

नाटा आदमी

पंडरू ख़ेर

सफेद मुर्गी

दिगहा खाड़

लंबी नदी

मोखारो अल्ला

काला कुत्ता

मोखारो जम्बु

काला जामुन

मेच्छा मन्न

ऊंचा पेड़

चेड़ा जोखस

दुबला लड़का

मेच्छा आलस

लंबा आदमी

4. Frequently Asked Questions (FAQs) - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. कुँड़ुख़  भाषा में विशेषण को क्या कहते हैं?

उत्तर: कुँड़ुख़  (उरांव) भाषा में विशेषण को 'गुनखी' कहा जाता है।


Q2. कुँड़ुख़  व्याकरण में गुनखी (विशेषण) के कितने भेद होते हैं?

उत्तर: कुँड़ुख़  व्याकरण में गुनखी के मुख्य रूप से 4 भेद (नाख गोटंग डाड़ा) होते हैं:

  1. गुन गुनखी (गुणवाचक विशेषण)

  2. जोक्खा गुनखी (परिमाणवाचक विशेषण)

  3. लेक्खा गुनखी (संख्यावाचक विशेषण)

  4. चुगुल गुनखी (संकेतवाचक विशेषण)


Q3. 'लेक्खा गुनखी' और 'जोक्खा गुनखी' में क्या अंतर है?

उत्तर: 

  • लेक्खा गुनखी (संख्यावाचक): इससे संज्ञा/सर्वनाम की निश्चित या अनिश्चित संख्या का बोध होता है (जैसे: ऍड़, मूंद, सय झनर)।

  • जोक्खा गुनखी (परिमाणवाचक): इससे मात्रा, माप या तोल का बोध होता है (जैसे: जुक्की ख़ेस्स, तनि कुना अम्म)।


Q4. कुँड़ुख़  में 'चुगुल गुनखी' किसे कहते हैं?

उत्तर: जब कोई सर्वनाम शब्द किसी संज्ञा की ओर संकेत करता है, तो उसे 'चुगुल गुनखी' (संकेतवाचक विशेषण) कहते हैं, जैसे: ई (यह), आ (वह), हू (वह दूर वाला)।


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